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Hindi Kahani | हिंदी कहानी

Hindi Kahani | हिंदी कहानी: प्रेरक कहानियाँ (kahani) पढ़ना आपको जीवन के बारे में बहुत कुछ सिखा सकता है. ये कहानियाँ (kahaniya) अक्सर काल्पनिक होती हैं, लेकिन फिर भी ये आपको महत्वपूर्ण सबक सिखा सकती हैं. लेकिन उन सभी का एक ही लक्ष्य है: आपको सीखने और बढ़ने में मदद करना. इसलिए, चाहे आप बच्चे हों या वयस्क, इनमें से जितनी चाहें उतनी हिन्दी कहानियाँ (Hindi Kahani) पढ़ें!

बच्चे कहानी सुनना और पढ़ना बहोत अच्छा लगता है। नैतिक कहानियां, डरावनी नी कहानियां, बच्चों के लिए मज़ेदार कहानियाँ, सुपर हीरो की कहानियां, रात को सोने से पहले सुननेवाली कहानियांछोटे बच्चो की कहानियां ओर भी कई तरह की कहानियां होती है। जो बच्चो को अच्छी लगती है।

Hindi Kahani | हिंदी कहानी

हिंदी कहानियाँ एक ऐसी विधा जो जीवन को, परिस्थितियों को अपने में लेकर उलझी हुई समझ को, सुलझा देती हैं. हिंदी कहानी हमारे व्यक्तित्व को एक दर्पण की भांति हमारे सामने प्रेषित करती हैं जिनसे हमें अपने कर्मो का बोध होता हैं। माना कि कहानियाँ काल्पनिक होती हैं पर कल्पना परिस्थिती के द्वारा ही निर्मित होती हैं। पाठको को लुभाने एवं बांधे रखने के लिए कई बार भावों की अतिश्योक्ति की जाती हैं लेकिन अंत सदैव व्यवहारिक होता हैं, यथार्थता से परिपूर्ण होता हैं।

हिंदी कहानी गद्य का रूप हैं। इसे उपन्यास का सूक्ष्मतम रूप कहा जा सकता हैं जिनमे पात्र हैं, संवाद हैं, लेकिन उपन्यास की तरह पल- पल का विस्तार नहीं। हिंदी कहानी एक रूप में उपन्यास का सारांश हैं।

1. हाथी और रस्सी की कहानी | Hathi Aur Rassi ki Kahani

हाथी और रस्सी की कहानी  Hathi Aur Rassi ki Kahani
हाथी और रस्सी की कहानी Hathi Aur Rassi ki Kahani

एक समय की बात है एक बहुत ही शक्तिशाली और बलवान हाथी था । उसे बचपन से ही एक महावत ने पाला और उसे तरह-तरह के करतब सिखलाये थे। महावत प्रतिदिन हाथी को बाजार ले जाता था ।

हाथी बाजार में करतब दिखलाता था करतब देखकर लोग खुश होते और हाथी और महावत को पैसा देते थे इसी पैसे को महावत एकत्र कर लेता था और उसी से उसकी रोजी-रोटी का चलती थी।

घर जाने के पश्चात महावत हाथी को एक पतली सी रस्सी से बांध देता था। लोगों को यह बात बड़ी अजीब सी लगती थी कि इतना हट्टा-कट्टा हाथी इतनी पतली सी रस्सी से कैसे बंधा हुआ था। एक दिन एक व्यक्ति ने महावत से पूछा- ” महावत भाई ! आपका हाथी तो इतना हष्ट-पुष्ट और बलवान है किंतु आप इसे इतनी पतली सी रस्सी से बांधते हो, हाथी जब चाहे इस रस्सी को बड़ी ही आसानी से तोड़ सकता है फिर भी वह ऐसा नहीं करता । इसका क्या कारण है? ”

उस व्यक्ति की बात सुनकर महावत बोला -” कई साल पहले जब मैं हाथी को जंगल से लेकर आया था तब हाथी छोटा था । तब मैं इसे इसी तरह की पतली सी रस्सी से बांधा करता था। उस समय हाथी बहुत छोटा था उसने कई बार इस रस्सी को तोड़ने का प्रयास किया किंतु बचपन में वह इसे नहीं तोड़ सका । धीरे-धीरे उसके मन में यह बात बैठ गई कि वह कभी भी इस रस्सी को नहीं तोड़ पायेगा। अब हाथी बड़ा हो चुका है वह चाहे तो एक ही झटके में इस रस्सी को तोड़ सकता है किंतु हाथी अब इस रस्सी को तोड़ने का प्रयास भी नहीं करता क्योंकि वह सोचता है कि वह इस रस्सी को नहीं तोड़ पाएगा। किंतु अब वह चाहे तो इस रस्सी को एक ही झटके में तोड़ सकता है।”

व्यक्ति को सारी बात समझ में आ गई कि किसी भी जीव के दिमाग में जो बात बैठ जाए वह सारी उम्र उसके सांथ रहती है ।

शिक्षा – हाथी की कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि जो बात बचपन में हमारे दिलों दिमाग में बैठ जाती है वह सारी उम्र साथ रहती है। इसीलिए बच्चों को बचपन में अच्छी सीख देनी चाहिए ताकि वह सारी उम्र उस पर अमल कर सकें।

2. नकलची तोते की कहानी | Nakalchi Tote ki kahani

नकलची तोते की कहानी  Nakalchi Tote ki kahani
नकलची तोते की कहानी Nakalchi Tote ki kahani

एक बार की बात है, एक जंगल में एक तोता रहता था । वह बहुत ही नकलची था। तोता हर तरह की आवाजों की नकल कर सकता था। एक दिन तोता जंगल में घूम रहा था कि उसे एक आदमी मिला। आदमी बहुत ही दुखी लग रहा था। तोते ने आदमी की आवाज की नकल की और कहा, “मैं बहुत दुखी हूँ ।” तोते की आवाज सुनकर आदमी बहुत हैरान हुआ । उसने कभी नहीं सोचा था कि एक तोता इंसानों की आवाज इतनी अच्छी तरह नकल कर सकता है। आदमी ने तोते से पूछा, “तुमने यह कैसे सीखा?”

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तोते ने कहा, “मैं बहुत ही नकलची हूं। मैं हर तरह की आवाजों की नकल कर सकता हूं ।” आदमी बहुत खुश हुआ । उसने तोते को अपने साथ घर ले जाने का फैसला किया। वह तोते को अपने दोस्त और परिवार को दिखाना चाहता था। घर पर आदमी ने तोते को अपने दोस्त और परिवार को दिखाया। सभी लोग तोते की नकलची आवाजों से बहुत प्रभावित हुए।

वे सभी तोते को बहुत पसंद करने लगे । एक दिन आदमी को काम से वाहर जाना था। उसने तोते को घर पर अकेला छोड़ दिया। तोता बहुत बोर हो गया। उसने कुछ करने की सोची। उसने टीवी चालू किया और एक शो देखने लगा। शो में एक इंसान गाना गा रहा था। तोते ने इंसान की आवाज नकल की और गाना गाना शुरू कर दिया। तोते का गाना सुनकर पड़ोस के लोग बहुत हैरान हुए। तोते के गायन की बात पूरे शहर में फैल गई। लोग दूर-दूर से तोते को सुनने के लिए आने लगे। तोता अब बहुत ही लोकप्रिय हो गया ।

एक दिन, एक संगीतकार ने तोते को देखा। संगीतकार तोते के गायन से बहुत प्रभावित हुआ। उसने तोते को अपने साथ अपने ऑर्केस्ट्रा में ले जाने का फैसला किया। तोता संगीतकार के ऑर्केस्ट्रा में शामिल हो गया। वह बहुत खुश था। वह अपने पसंदीदा काम को करने लगा था। तोता बहुत अच्छे से गाता था। वह ऑर्केस्ट्रा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण सदस्य बन गया धीरे-धीरे तोते की प्रसिद्धि देश भर में फ़ैल गई और तोता देश वासियों का चहेता बन गया ।

शिक्षा- तोते की कहानी हमें बताती है कि हम सभी में कुछ न कुछ खास होता है। हमें अपनी खासियतों को पहचानना चाहिए और उनका इस्तेमाल करना चाहिए।

3. सांप और चींटी की कहानी | Samp aur Chiti ki kahani

सांप और चींटी की कहानी  Samp aur Chiti ki kahani
सांप और चींटी की कहानी Samp aur Chiti ki kahani

एक समय की बात है एक जंगल में एक सांप रहता था। सांप जंगल के छोटे-मोटे जानवरों जैसे चूहा, मेंढक, छिपकली, गिलहरी, पक्षियों के अंडों को खाकर बहुत बड़ा और मोटा हो गया था। सांप के विशाल आकार के कारण जंगल के बड़े-बड़े जानवर भी उसके पास आने से डरते थे। जंगल के छोटे-छोटे जानवरों ने सांप की शिकायत हाथी और शेर से भी की किंतु शेर और हाथी भी उस विशाल सांप का कुछ नहीं कर सके क्योंकि जब भी वह सांप को समझाने जाते तो सांप अपना विशाल फन लेकर उनके सामने खड़ा हो जाता था । सांप कहीं उसे काट ना ले इसी डर से जंगल का कोई जानवर उसके नजदीक नहीं चाहता था।

धीरे-धीरे सांप को यह घमंड हो गया कि जंगल का कोई भी जीव उसका सामना नहीं कर सकता। सांप ने सोचा कि जब जंगल का राजा शेर ही मुझसे डरता है तो क्यों ना मैं भी एक राजा की तरह किसी विशाल घर में रहूं । यह सोच कर सांप एक विशाल बरगद के पेड़ के बिल में रहने लगा।

सांप के आने से डर के कारण बरगद में रहने वाले सभी जीव-जंतु और पक्षी उस पेड़ को छोड़कर चले गए। बरगद के पेड़ के पास ही चीटियों की बांबी थी। सांप जब भी कहीं जाता तो उसे रास्ते में चींटियाँ मिल जाती थी । चींटिया हमेशा अपने काम में व्यस्त रहती थीं और सांप को नमस्कार नहीं करती थी । चीटियों का यह व्यवहार सांप को पसंद नहीं आया । एक दिन वह चीटियों की रानी से बोला , ” तुम अपनी सेना को समझा देना कि मैं जब भी यहां से गुजरता हूं तो मुझे सर झुका कर नमस्कार करें नहीं तो मैं सभी को मार दूंगा। ”

सांप की बात चीटियों की रानी को बिल्कुल भी पसंद नहीं आई और उसने सांप की बात मानने से इन्कार कर दिया। सांप ने गुस्से में आकर अपनी पूंछ से चीटियों की बांबी पर प्रहार कर दिया जिससे उनके घर को काफी नुकसान पहुंचा।

सांप के इस व्यवहार से सभी चीटियां बहुत अधिक क्रोधित हो गई और उन्होंने एक साथ मिलकर सांप पर हमला कर दिया । चीटियों के काटने से सांप की बहुत बुरी हालत हो गई धीरे-धीरे चीटियों की संख्या बढ़ती जा रही थी और सांप अपने आपको असहाय महसूस करने लगा। आखिरकार चीटियों के हमले से सांप की मौत हो गई और जंगल के जानवरों को उस खतरनाक सांप से मुक्ति मिल गई।

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शिक्षा – ” इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि कभी भी किसी भी जीव को छोटा समझ कर उस पर अत्याचार नहीं करना चाहिए। एकता में बहुत शक्ति होती है।”

4. शेर और बन्दर की कहानी | Sher aur Bankar ki kahani

शेर और बन्दर की कहानी  Sher aur Bankar ki kahani
शेर और बन्दर की कहानी Sher aur Bankar ki kahani

एक समय की बात है, एक घने जंगल में पिंकू नाम का एक चतुर और शरारती बंदर रहता था उसी जंगल में शेरू नाम का एक शक्तिशाली राजसी शेर रहता था। वे दोनों पड़ोसी थे लेकिन उनका व्यक्तित्व बहुत अलग था।

पिंकू नाम का बंदर हमेशा ऊर्जा से भरा रहता था और उसे जंगल में अन्य जानवरों के साथ मज़ाक करना पसंद था। वह अपनी चालाकी के लिए जाना जाता था और अक्सर चालाकी दिखाने के चक्कर में खुद को परेशानी में डाल लेता था। दूसरी ओर शेरू बुद्धिमान और दयालु था | जंगल के सभी जानवर उसका सम्मान करते थे। वह अपनी बहादुरी और नेतृत्व के लिए जाना जाता था |

एक दिन ,पिंकू ने शेरू के सांथ एक मजाक करने का फैसला किया। उसने सोचा कि शक्तिशाली शेर को चुनौती देना और अन्य जानवरों के सामने अपनी चतुराई साबित करने में बड़ा मजा आयेगा । वह एक ऊँचे पेड़ की चोटी पर चढ़ गया और चिल्लाया- “हे शेरू ! मैं तुम्हें ताकत और चपलता की प्रतियोगिता के लिए चुनौती देता हूँ। देखते हैं जंगल के दूसरी ओर नदी तक कौन पहले पहुँच सकता है!”

शेरू बुद्धिमान होने के नाते, जानता था कि पिंकू बन्दर कुछ करने वाला है, लेकिन उसने बंदर के साथ खेल खेलने का फैसला किया। उसने जवाब दिया, “बहुत अच्छा, पिंकू । मैं तुम्हारी चुनौती स्वीकार करता हूं।”

जंगल के अन्य जानवर प्रतियोगिता देखने के लिए इकट्ठा हो गए । शेरू और पिंकू प्रतियोगिता के लिए तैयार होकर साथ-साथ खड़े हो गए । जैसे ही दौड़ शुरू हुई, पिंकू अपने लाभ के लिए अपनी चपलता का उपयोग करते हुए, एक शाखा से दूसरी शाखा पर झूलते हुए, आगे बढ़ता गया । वह तेज़ और फुर्तीला थाऔर उसे विश्वास था कि वह ही जीतेगा।

दूसरी ओर शेरू जंगल में शांति और स्थिरता से चलता रहा। वह जानता था कि पिंकू के साथ दौड़ना उचित नहीं होगा क्योंकि उसे ताकत के लिए बनाया गया था, बंदर की तरह गति के लिए नहीं।

जैसे ही पिंकू आधे रास्ते पर पहुंचा, वह यह देखने के लिए पीछे मुड़ा कि शेरू कहाँ है। उसे आश्चर्य हुआ कि उसे शेर कहीं भी दिखाई नहीं दिया। पिंकू बन्दर यह सोचकर खुद पर हंसा कि उसने शेर को मात दे दी है।

हालाँकि पिंकू बन्दर को यह नहीं पता था कि शेर ने एक अलग रास्ता अपना लिया है। वह नदी के लंबे लेकिन अधिक सीधे रास्ते का अनुसरण करते हुए ओर चला गया था।

जैसे ही पिंकू बन्दर नदी के पास पहुंचा, वह यह देखकर चौंक गया कि शेर तो पहले से ही वहां पहुँच चुका था और शांति से नदी के किनारे से पानी पी रहा था। यह देखकर पिंकू बन्दर को शर्मिंदगी महसूस हुई और उसे एहसास हुआ कि उसने शेरू की बुद्धिमत्ता और रणनीति को कम आंका था।

शेरू ने पिंकू बन्दर को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, ” पिंकू, तुम तेज़ और फुर्तीले हो, लेकिन याद रखो कि बुद्धि और बुद्धिमत्ता कभी-कभी अधिक शक्तिशाली हो सकती है।”

पिंकू को शेरू की बातें सुनकर थोडा अच्छा लगा और उसने स्वीकार किया कि शेर को चुनौती देना उसकी मूर्खता थी। उस दिन के बाद से, पिंकू ने दूसरों के साथ छल करना बंद कर दिया और ज्ञान और नेतृत्व के मूल्य की सराहना करना सीख लिया।

पिंकू बंदर और शेरू शेर, ने एक साथ समय बिताया और पिंकू ने शेरू के मार्गदर्शन से कई मूल्यवान सबक सीखे। दोनोंने साथ मिलकर जंगल में शांति और सद्भाव सुनिश्चित किया, सभी जानवरों को सम्मान, दया और समझ का महत्व सिखाया।

इस प्रकार, चतुर बंदर और बुद्धिमान शेर जंगल में मित्रता और सहयोग की विरासत छोड़कर हमेशा के लिए खुशी से रहने लगे।

शिक्षा- बन्दर और शेर की कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी दूसरे को नीचा दिखलाने के लिए मजाक नहीं करना चाहिए अन्यथा हमारा ही मजाक बनकर रह जाता है।

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5. गधा और घोड़े की कहानी | Gadha aur ghoda ki kahani

गधा और घोड़े की कहानी  Gadha aur ghoda ki kahani
गधा और घोड़े की कहानी Gadha aur ghoda ki kahani

एक समय की बात है एक गांव में एक व्यापारी रहता था उसके पास एक गधा था। वह जब भी व्यापार करने जाता तो अपना सारा सामान गधे पर लादकर खुद पैदल जाता था। व्यापारी को धीरे-धीरे व्यापार से अच्छा लाभ होने लगा तो उसने सोचा कि क्यों ना एक घोड़ा खरीद लूं फिर मैं गधे पर सामान लाद लिया करूंगा और खुद घोड़े पर जाया करूंगा इससे समाज में भी मेरा मान सम्मान बढ़ जाएगा।

व्यापारी बाजार गया और वहां से एक महंगा सा घोड़ा खरीद लिया। घोड़ा बहुत ही हष्ट पुष्ट और फुर्तीला था। व्यापारी ने घोड़े के को बांधने के लिए एक अस्तबल बनवाया और उसी में गधे को भी बांध दिया करता था। वह घोड़े को अच्छा खाना देता और गधे को बचा खुचा खाना देता था जिससे गधा बहुत कमजोर हो गया था। व्यापारी जब भी व्यापार करने जाता तो गधे पर अपना सामान रख लेता और खुद घोड़े पर बैठकर जाता था।

घोड़े को मिल रही सुविधाओं के कारण घोड़ा अपने आप को गधे की तुलना में बहुत ही बड़ा समझने लगा और वह गधे को कभी भी महत्व नहीं देता था। घोड़ा अपने सभी कार्य तो गधे से करवा लिया करता था किंतु वह गधे का कोई भी काम नहीं करता था।

एक बार व्यापारी व्यापार करके लौट रहा था लौटते समय रास्ते में नदी पड़ती थी और रास्ता बहुत उबड़ खाबड़ और पथरीला था । सामान का बोझ अधिक होने के कारण गधे से चला नहीं जा रहा था और उसे लग रहा था शायद यह उसके जीवन का आखिरी सफर है। अपने आप को अत्यधिक कठिनाई में देखकर गधा घोड़े से बोला भाई आज अधिक वजन होने के कारण और रास्ता खराब होने के कारण मुझसे चला नहीं जा रहा है आप तो इतने हष्ट पुष्ट हैं कृपया मेरा कुछ सामान आप रख लीजिए जिससे मेरा बोझ कम हो जाएगा और मैं आसानी से चल पाऊंगा।

गधे के मुंह से इस तरह की बात सुनकर घोड़ा उस पर अत्यधिक क्रोधित हुआ और बोला मैंने कभी बोझ उठाया है जो आज उठाऊंगा। जो तेरा काम है वह तू कर मैं तो सिर्फ सेठ को अपनी पीठ पर बैठा कर ले जाता हूं।

घोड़े की बात सुनकर गधे को अत्यधिक निराशा हुई और वह जैसे तैसे रास्ते पर आगे बढ़ने लगा तभी एक गड्ढे में उसका पैर फंस जाने के कारण गधे की टांग टूट गई और सारा सामान जमीन पर गिर गया। गधे से अब उठा भी नहीं जा रहा था।

व्यापारी ने देखा कि गधे की टांग टूट गई है तो वह घोड़े से उतर कर गधे के पास आया और गधे के सारे सामान को घोड़े के ऊपर लाद दिया साथ ही गधे को भी घोड़े पर ही बैठा दिया। अब घोड़े की हालत खराब हो चुकी थी और उसका घमंड भी चकनाचूर हो गया था।

घोड़ा सोचने लगा कि काश मैंने गधे की मदद की होती तो ना तो उसका पैर टूटता और ना ही मुझे आज यह दिन देखना पड़ता।

शिक्षा- गधा और घोड़े की कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें सदैव दूसरों की मदद करना चाहिए अन्यथा मुसीबत में हमारी भी कोई मदद नहीं करेगा।

FAQ: Hindi Kahani | हिंदी कहानी

1. कहानी क्या है?

अमेरिका के कवि-आलोचक-कथाकार ‘एडगर एलिन पो’ के अनुसार कहानी की परिभाषा इस प्रकार हैः “कहानी वह छोटी आख्यानात्मक रचना है, जिसे एक बैठक में पढ़ा जा सके, जो पाठक पर एक समन्वित प्रभाव उत्पन्न करने के लिये लिखी गई हो, जिसमें उस प्रभाव को उत्पन्न करने में सहायक तत्वों के अतिरिक्‍त और कुछ न हो और जो अपने आप में पूर्ण हो।

2. कहानी बच्चों को क्यों सुनाई जाती है?

कहानीया अलग अलग प्रकार की होती है। ये सुनने वाले पर निर्भर करता है की वो कोन से प्रकार की कहानी सुनाता है। बच्चों कहानी सुनने में मजा आता है। ओर कहानी में सिख भी होती है। जिससे बच्चों को सीखने को मिलता है। इसी लिया छोटे बच्चो को कहानी सुनाई जाती है।

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